Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 51
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--मेषे5क गंगागोदान्तरे5पि सद्व्नतोद्ाहौ (भवेताम्‌)। कलिगे गौडगजरे (देशे) सर्व: सिहंगुरु: वर्ज्य: ॥॥ ५०-५१ ॥। यदि सूर्य मेष में होऔर बृहस्पति सिह राशि में हो तो गड्ा और गोदावरी के मध्यवर्ती देशों में भी यज्ञोपवीत और विवाह शभ है । परन्तु कलिज्भ, गौड़, गुजर इन देशों में सम्पूर्ण सिहस्थ बृहस्पति वर्जनीय है.॥। ५०-५१ ॥

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