Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 43
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

भद्राकाल क्‍ शुकक्‍्ले पूर्वाद्धंषष्टमीपड्चदव्योभंद्रेकाददयां चतुर्थ्या पराद्धें । कृष्णेबन्त्याद्वें स्थात्ततीयादशस्यो: पुर्वे भागे सप्तमीशंभृतिथ्योः ॥ ४३ ॥ अन्वयः--शुक्ले अष्टमी पञचदश्यो: पूर्वार्ध, (तथा) एकादश्यां चतुर्थ्या पराधें भद्रा (भवति) । कृष्ण तृतीयादशम्यो: अन्त्याधें, सप्तमीशम्भुतिथ्यो: पूर्वों भागे भद्रा (भवति ) ॥ ४३ ॥। शुक्लपक्ष की अष्टमी और पूर्णमासी के पूर्वार्ध मेंतथा एकादशी और चौथि के उत्तरार्ड में भद्रा होती है। कष्णपक्ष कीतीज और दशमी के उत्तरार्ड में तथा सप्तमी और चतुदंशी के पूर्वाद्ध में भद्रा होती है ॥। ४३ ॥।

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse