Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 42
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

यदि क्रकचादि कोई दृष्टपोग हो और उसी काल में कोई सिद्धादि शुभ योग भी हो तो वह शुभ योग उस क्रकचादि के फल को नष्ट करके कार्य की सिद्धि करता है। कोई आचार्य कहते हैं कि लग्न शुद्ध हो तो उसी से संपूर्ण कुयोगों का नाश होता है । भद्रा आदि मध्याह्ल के अनन्तर शुभ होते हैं । भद्रा आदि का परिहार "विष्टिरंगारकइ्चवव्यतीपातश्चवेधृति: । प्रत्यर जन्मनक्षत्र मध्याद्वात्परत: शुभम्‌ ॥ भद्रा, मंगल दिन, व्यतीपात, वेधृति, प्रत्यरितारा, जन्मनक्षत्र ये सब मध्याह्ष के अनन्तर शुभ होते हैं ।। ४२ ॥

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