Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्वयः-- मन्मिता . च शनौ शशिद्विनागां दिशा भवदिवाकरसंमिता च कलांशाः (मुहूर्ता:) ॥। ३८-३४ क्षण: स्यात् कुलिककण्टककालवला: स्यः । अर्धयामयमघण्टगता: स्यू: ।। इन्हीं मुह॒त्तों मेंकोई होते हैं । दृष्टक्षण, कोई कुलिक, कंटक, कालवेला, अद्धंयाम और यमघण्ट. दिनमान का सोलहवाँ भाग एक मुहूत्ते है॥॥ ३८-३९ ॥।
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