अन्वयः--सूर्ये, षट्स्वरनागदिड्मनुमिताः, चन्द्रे5व्थिषट्कूड्जराड्धार्का विश्व- पुरन्दरा:, क्षितिसुते दच ग्य्यव्धितर्का: दिश:, सौम्य ढव्ध्रिगजाड्धूदिडमन्मिता:, जीवे तक॑ग्रहा: दिग्भास्करा: द्विषडभास्क रा, शक्राख्या, तिथय: कलाः च भृगुज वदेष दुष्ट: रविवार को छठा, सातवाँ, आठवाँ, दशवाँ, चौदह॒वाँ मुहूर्त; सोमवार को चौथा, छंठा, आठवाँ, नवाँ, बारहवाँ, तेरहवाँ, चौदहवाँ मुह॒त्ते; मंगल को दूसरा, तीसरा, चौथा, छठा, दशर्वाँ महत्ते; बुधवार को दूसरा, चोथा, आठवाँ, नवाँ, दशवाँ, चौदहवाँ मुह॒त्ते; बृहस्पति को दूसरा, छठा, बारहवाँ, चौदहवाँ, पन्द्रहवाँ, सोलहवाँ मुहृत्ते; शुक्रवार को चौथा, पाँचवाँ, छठा, नर्वां, दशवाँ, बारहवाँ, चौदहवाँ मुहत्त और शनेश्चर को पहिला, दूसरा, आठवाँ, दशवाँ, गेरहवाँ, बारहवाँ मुहर्त्त निन्दित होता है ।
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