Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 32
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

चन्द्रमा, सूये, मंगल, शनैरचर, राहु और केतु से युक्त लग्न, और नवांश; आधी रात और मध्यांक्न में बीस-बीस पल (दस पहिले और दस पीछे) ; पापग्रह का नवांश; सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण से पूर्व तीन दिन, भूकम्प आदि उत्पात और चन्द्र-सूर्य-ग्रहण के पश्चात्‌ सात दिन तथा शुभद उत्पात का दिन, इन सब को शुभ कार्यों में त्याग दे। मंगलादि पाँच ग्रहों से भेद को प्राप्त हुआ नक्षत्र, जिस नक्षत्र में मंगलादि पापग्रहों का युद्ध हुआ हो वह नक्षत्र, जिस नक्षत्र में कोई उत्पात हुआ हो वह नक्षत्र, इन सबको सम्पूर्ण शुभ कार्यों में छः महीने तक त्याग करे ॥| ३२॥।

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse