Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 30
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

रविवारादि सात दिनों में क्रम से विशाखा, पूर्वाषाढ़, धनिष्ठा, रेवती, रोहिणी, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी इन नक्षत्रों सेचार-चार नक्षत्र उत्पात, मृत्यु, काण, सिद्धि ये चार योग होते हैं अर्थात्‌ रविवार कौ विशाखा उत्पात, अनुराधा मृत्यु, ज्येष्ठा काण, मूल सिंद्धियोग; सोमवार को पूर्वाषाढ़ उत्पात, उत्तराषाढ़ मृत्यु, अभिजित्‌ काण, श्रवण सिद्धियोग; मंगल को धनिष्ठा उत्पात, शतभिष मृत्यु, पूर्वाभाद्रपद काण, उत्तराभाद्रपद सिद्धियोग; बुधवार को रेवती उत्पात, अश्विनी मृत्यु, भरणी काण, क्ृत्तिका सिद्धियोग; ब्रहस्पति को रोहिणी उत्पात, मृगशिरा मृत्यु, आर्द्रो काण, पुनर्वंसु सिद्धियोग; शुक्रवार को पुष्य उत्पात, आइलेषा मृत्यु, मघा काण, पूर्वाफाल्गुनी सिद्धियोग; शनेहचर को उत्तराफाल्गुनी उत्पात, हस्त मृत्यु, चित्रा काण, स्वाती सिद्धियोग होता है । इन चारों योगों का फल भी इनके नाम के सद॒श ही होता है ॥| ३०॥।

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