Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 29
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

जीवेःन्त्यमैत्राइव्यदितीज्यधिष्ण्यं शक्रन्त्यमैत्राइव्यदितिश्रवोभम्‌। दानौ श्रुतिब्राह्मममीरभानि सर्वार्थसिद्धिये कथितानि पूर्वः ॥ २९४ अन्बयः--( श्लोकक्रमेण ) पूर्वें: (एतानि) स्वार्थसिद्धच कथितानि ।। २८-२६ ॥ बृहस्पति को रेवती, अनुराधा, अध्विनी, पुनर्वंसु, पुष्य; शुक्रवार को रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनवेसु, श्रवण; शनदचर को श्रवण, रोहिणी और स्वाती हो तो सर्वार्थसिद्धि योग होता है । इस योग में जो कार्य किया जाता है वह सिद्ध होता है ॥ २९॥

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