Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 3
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अग्नि, ब्रह्मा, पार्वती, गणेश, सर्प, कात्तिकेय, सूर्य, शिव, दुर्गा, यम, विश्वेदेव, हरि, कामदेव, शिव और चन्द्रमा ये देवता क्रम से प्रतिपदादि पन्‍्द्रह तिथियों के स्वामी हैं, अर्थात्‌ प्रतिपदा के अग्नि, द्वितीया के ब्रह्मा, तृतीया के पार्वती, चतुर्थी के गणेश, पंचमी के सर्प, षष्ठी के कात्तिकेय, सप्तमी के सूर्य, अष्टमी के शिव, नवमी के दुर्गा, दशमी के यम; एकादशी के विश्वेदेव, द्वादशी के हरि, त्रयोदशी के कामदेव, चतुर्दशी के शिव, पूर्णणासी के चन्द्रमा और अमावस के पितर स्वामी हैं। जिन तिथियों के जो स्वामी हैं, उन देवताओं की पूजावा प्रतिष्ठा आदि उन्हीं तिथियों में करने से शुभदायक होते हैं ।। ३॥।

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