Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 2
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अनन्त दंवज्ञ के पुत्र राम मुह॒त्तंचिन्तामणि नाम ग्रन्थ की रचना करते हैं । यह ग्रन्थ जातकर्म आदि अनेक कर्मों केकरने वा न करने योग्य शुभाशुभ मुहत्ते केजानने का कारण है और इसमें थोड़े ढब्दों में मुख्य अर्थ प्रकट किये गये हैं । मुह॒त्तचिन्तामणि के दो अर्थ हैं। पहिला यह कि दिन और रात्रि के पन्द्रहवें भाग कोऔर किसी कार्य को करने के लिए विचारे हुए शुभाशुभ काल को मुहूत्त कहते हैं। उसके शुभाशुभत्व के विचारने के लिए जितने ग्रन्थ हैंउन सबों में श्रेष्ठ ।दूसरा अर्थ यह है कि वाड्छित फल देनेवाले मणि के सदृश वाडि्छत मुहत्तों का ज्ञान करानेवाला ग्रन्थ | २॥।

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