Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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दुष्टयोगों का परिहार ध्वांक्षे बच्चे मुद्गरे चेषुनाड्यो वर्ज्या वेदा: पदमलुम्बे गदेइवाः । धम्रे काले मौसले भद्वयं हे रक्षो मृत्युत्पातकालाइच सर्वे ॥| २६॥ अन्वयः--ध्वांक्षे वजन मुद्ंगरे (योगे) इषुनाड्य:, पदमलम्ब (योग) बेदाः, गद़े अश्वा: [सप्त] नाड्च: वर्ज्या:। धूम्रे भू, काणे दयं, मौसले ढे, च (पुनः) रक्षोमृत्यत्पातकाला: (योगं:) सर्वे वर्ज्या: ।। २६ ॥। ध्वांक्ष, वज्र, मुदूगर इन तीन -योगों में- प्रथम पाँच दण्ड; पद्म, लुम्ब इन दो में प्रथम चार दण्ड, गद योग में प्रथम सात दण्ड; धृम्र में एक दण्ड; काण में दो दण्ड; मुसल में दो दण्ड, और रक्ष, मृत्यु, उत्पात, काल, ये सम्पूर्ण, शुभ कार्यों में वर्जनीय हैं ।। २६ ॥।
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