इन योगों के जानने का उपाय दास्रादक मृगादिन्दा सार्पाद्भोमे करादबुंधे। मैत्रादगुरो भगो वेश्वाद््गण्या सन््दे च वारुणात् ॥ २५॥॥ अन्वयः--अके दास्रात्, इन्दौ मृगात्, भौमे सार्पात्, बुधे करात्, गुरौ मैत्नात्, भगौ वैश्वात्, मन्दे वारुणात् (आनन्दादयों योगाः क्रमेण ) गण्या: ॥ २५॥ रविवार को अश्विनी से, सोमवार को मृगशिरा से, मंगल को आइलेषा से, बुध को हस्त से, बृहस्पति को अनुराधा से, शुक्र को उत्तराषाढ़ से, शनैदचर को शतभिष से, अभिजित् के सहित इष्ट दिन नक्षत्र तक गणना करने से जितनी संख्या हो आनन्दादि गणना से उतनी ही संख्यावाला योग इष्ट दिन में जानना चाहिए । जैसे रविवार के दिन यदि श्रवण नक्षत्र हो तो अद्विनी से अभिजित् सहित गिनने पर श्रवण तेइसवाँ हुआ और आनन्दादिकों की गणना करने पर गदयोग तेइसवाँ हुआ। यही योग उस रविवार को होगा । इसी रीति सेऔर भी जानना चाहिए ॥ २५॥।
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