Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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उत्पातमृत्यू किल काणसिद्धी शुभो5म्ृताख्यों सुसलं गदइच । मातड्भरक्षशचरसुस्थिराख्यप्रवद्धमाना: फलदाः स्वनाम्ना ॥| २४॥ अन्वयः-- (निश्चयेन ) काणसिद्धी, शुभ:,; अमृताख्य:, मुसलं, गद: च मातज्भरक्षश्चरसुस्थिराख्य- प्रवर्धभाना: क्रमेण (एते अष्टाविशतियोगाः) स्व॒नाम्ना फलदाः (भवन्ति ) ॥ २३-२४ ।। आनन्द, कालदण्ड, धम्र, धाता, सौम्य, ध्वांक्ष, केतु, श्रीवत्स, वज्ञ, मुद्गर, छत्र, मित्र, मानस, पद्म, लुम्ब, उत्पात, मृत्यु, काण, सिद्धि, शुभ, अमृत, मुसल, गद, मातंग, रक्ष, चर, सुस्थिर और प्रवर्धमान, ये अट्ठाइस योग अपने नाम के सदृश फल देनेवाले हैं | २३-२४॥।
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