Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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सम्पूर्ण दोषों कानाशक रवियोग सूर्य भाद्देदगोतक दिग्विशवनखसंमिते । चन्द्रक्षे रवियोगाः स्युदोषसंघविनाशका: ।। २७॥ अन्वयः-- (श्लोकक्रमेण )सुगमः ।। २७ ॥। सूर्य जिस नक्षत्र में हो उस नक्षत्र सेवर्तमान चन्द्र नक्षत्र चौथा, नवाँ, छठा, दशवाँ, तेरहवाँ, बीसवाँ हो तोरवियोग होता है। यह सम्पूर्ण दोषों का नाश करनेवाला है ॥ २७॥
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