Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
चेत्रादि मासों में शून्य राशियाँ घटो झषो गौसिथुनं मेषकन्याईलितोलिनः । धनुः कर्को मृगः सिहरुचत्रादों शून्यराशय ॥ १६ ॥ अन्वयः--चेत्रादौ (क्रमेश )घट:, झष:, गौः, मिथुनं, मेषकन्यालितौलिन:, धनु:, कर्क:; मृग:, सिह: (एते) शुन्यराशयः (ज्ञेया:) ॥ १६ ॥। चेत्र में कुम्भ, वेशाख में मीन, ज्येष्ठ में वृष, आषाढ़ में मिथुन, श्रावण में मेष, भादौं में कन्या, कुवार में वृश्चिक, कात्तिक में तुला, अगहन में धनु, पौष में ककं, माघ में मकर और फाल्गुन में सिंह शून्य है । इन लग्नों में शुभ कार्य न करना चाहिए ॥ १६॥
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