Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 17
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

प्रतिपदादि विषम तिथियों में दग्ध लग्नें पक्षादितस्त्वोजतिथौ धर्टणों मृगेन्द्रनक्नो मिथुनाडुने च। चापेन्दुभे कक हरी हयान्त्यो गोन्त्यों च नेष्ठे तिथिशून्यलग्ने ॥ १७॥ अन्वयः--पक्षादित: ओजतिथौ (क्रमेण) धट्टेणौ, , मृगेन्द्रकक्नी, मिथुनाजुने, चापन्दुभे, ककंहरी, हयान्त्यौ, गोन्त्यो (एते) तिथिशुन्यलग्ने, नेष्ट ।। १७ ॥ शुक्ल और कृष्ण पक्ष की विषम तिथियों में ये लग्नें दग्धसंज्ञक हैं। प्रतिपदा में तुला और मकर, तृतीया में सिह और मकर, पञ्चमी में मिथन और कन्या, सप्तमी में कर्क और धनु, नवमी में कक और सिह, एकादशी में धनु और मीन, त्रयोदशी में वृुष और मीन शून्य हैं। इसलिये इनमें कोई हुभ कार्य न करे ॥ १७॥

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