If in a birth chart there are a larger number of rekhas in the 11th than those in the 10th, and there are a smaller number of rekhas in the 12th than those in the 11th, and the Ascendant contains the largest number of rekhas, the native will be wealthy and will enjoy all kinds of comforts and luxuries.
तन्वादि व्ययपर्यन्तं दृष्ट्वा भावफलानि वै । अधिके शोभनं ज्ञेयं हीने हानिं विनिर्दिशेत् । । 6 । । मध्ये मध्यफलं ब्रूयादतत्तद्भावसमुद्भवम् । कष्टान् राशीन् मुहूर्तेषु वर्जयेत्सर्वदा बुधः । । 7 । । लग्न से व्यय तक जिस भाव में अधिक श्रेष्ठ रेखाएँ हों, उस भाव की वृद्धि होती है व मध्यम रेखायोग से मध्यम फल तथा हीन रेखायोग से हीन फल होता है । कष्टफलद कम रेखायोग वाली राशि में सम्बन्धित ग्रह गोचर रहने पर, मुहूर्तादि में उसे वर्जित करना चाहिए । सब कामों में चन्द्रबल देखा जाता है । अतः चन्द्रमा कष्ट राशि में हो तो शुभ कार्य न करें । विवाहादि में गुरुबल आदि भी इसी तरह देखें । लेकिन 6, 8, 12 में कम रेखा होना शुभ है, यह बात यहाँ स्वतः सिद्ध है ।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.