Amongst the 12 houses (including the Ascendant), more than 30 rekhas advance the effects of a house, between 25 and 30 rekhas produce medium effects, and the effects of the house which contains less than 25 rekhas gets damaged.
तन्वादि व्ययपर्यन्तं दृष्ट्वा भावफलानि वै । अधिके शोभनं ज्ञेयं हीने हानिं विनिर्दिशेत् । । 6 । । मध्ये मध्यफलं ब्रूयादतत्तद्भावसमुद्भवम् । कष्टान् राशीन् मुहूर्तेषु वर्जयेत्सर्वदा बुधः । । 7 । । लग्न से व्यय तक जिस भाव में अधिक श्रेष्ठ रेखाएँ हों, उस भाव की वृद्धि होती है व मध्यम रेखायोग से मध्यम फल तथा हीन रेखायोग से हीन फल होता है । कष्टफलद कम रेखायोग वाली राशि में सम्बन्धित ग्रह गोचर रहने पर, मुहूर्तादि में उसे वर्जित करना चाहिए । सब कामों में चन्द्रबल देखा जाता है । अतः चन्द्रमा कष्ट राशि में हो तो शुभ कार्य न करें । विवाहादि में गुरुबल आदि भी इसी तरह देखें । लेकिन 6, 8, 12 में कम रेखा होना शुभ है, यह बात यहाँ स्वतः सिद्ध है ।
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