Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जिस प्रकार चन्द्र शुक्र और समराशिनवांश से वर को कन्यालाभ कहा गया है उसी प्रकार--पुरुषग्रह विषमराशि में हों, विषमराशि द्रेष्काण और नवांश को देखते हों तो कन्या को वर की प्राप्ति होती है। अब निमित्त कहते हैं कि--प्रश्न के समय लिंगी (कापालिक आदि) बालक तथा पशु आदि जन्तुओं की जिस प्रकार चेष्टा हो उसी प्रकार उस कन्यावर को भी समझना चाहिये ॥ ३ ॥
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