Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
वरकन्यालाभार्थ प्रश्नलग्न से १०, ११, ५, ३, ७ इन स्थानों में चन्द्रमा हो और बृहस्पति से दृष्ट हो तो वधूवरसंगमकारक होता है। अर्थात् वर के लिये कन्या और कन्या के लिये वर मिलता है। तथा शुक्र और चन्द्रमा की राशि (वृष, तुला, कर्क ये) लग्न हो और शुक्र चन्द्रमा से दृष्ट युत हो, वा समराशि (वृष आदि) के द्रेष्काण, नवांश लग्नगत हो और शुक्रचन्द्र से दृष्ट युत हो तो कन्यालाभ होता है ॥ १ ॥
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