Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
रात्रि में इष्टकाल बनाना हो तो सूर्य में ६ राशि जोड़ देना, और दिन में केवल सूर्य ही में अयनांश जोड़कर उसके भोग्यांश को, इष्ट लग्न में अयनांश जोड़कर उसके सुक्तांश को अपने देशीय उदयमान से गुनाकर ३० का भाग देने से क्रम से सूर्य का भुक्तपल और सूर्य के भोग्यपल होते हैं। उनके योग में सूर्य और लग्न के मध्यगत राशियों के स्वोदयमान जोड़ने से इष्टकाल होता है ॥ ७ ॥
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