Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
विवाहकालिक इष्ट समय में — गत संक्रान्तिका से इष्टकाल पर्यन्त जितने दिनादि हो उसमें गत और अभिमत संक्रान्ति के अन्तर्गत दिनादि से भाग देने से राश्यादिक लब्धि में मेषादि गत संक्रान्ति तक की राशि संख्या मिलाने से स्पष्ट सूर्य होता है। तथा इष्ट लग्न में इष्ट नवांश से पूर्व की संख्या को १० से गुना करके ३ का भाग देने से लब्धि इष्ट लग्न के अंशादि होते हैं ॥ ६ ॥
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