Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
सम राशि में प्रथम चन्द्र की, तब सूर्य की, और विषम राशि में प्रथम रवि की, तब चन्द्र की होरा होती है। तथा प्रथम, पञ्चम और नवम राशियों के क्रम से द्रेक्काण होते हैं। अपनी राशि से आरम्भ कर द्वादश राशियों के स्वामी द्वादशांश के स्वामी होते हैं। शुभग्रह की राशि, और ग्रह भी स्वकीय मित्र और शुभग्रह के नवांश में हो तो शुभ होते हैं ॥ १५ ॥
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