Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
चन्द्र और सूर्य के ग्रहण से गर्वित होने के कारण यह चन्द्रपात दूसरे (भौमादि) ग्रहों के पात की तुलना में प्राप्त नहीं है। अर्थात् वह सबसे महान् है। क्योंकि इसी के समीप में ग्रहण होता है, दूसरे पातों के समीप में नहीं। तथा दूसरी बात यह कि जातक, संहिता आदि में जैसे चन्द्रराशि से फल कहा है उस प्रकार अन्य ग्रहों की राशि से क्यों नहीं है? अतः केवल चन्द्रपात में ही ग्रहत्व सिद्ध है ॥ ७ ॥
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