Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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इसी हेतु से कितने (वैष्णव और निम्बादित्यसम्प्रदाय के लोग) दशमी में पूर्वकापालिक वेध मानते हैं। अर्थात् मध्यरात्रि से मध्यदिन पर्यन्त पूर्वकपाल है — अतः रात्रि उत्तरार्ध में ही दशमी से विद्धा एकादशी हो तो उसे त्याग देते हैं। इसी प्रकार पूर्णमासी में पितरलोग के सध्यरात्रि होने से नियम और व्रतादि में पूर्णिमान्त से ही (कृष्णादि) मास ग्राह्य है ॥ २१ ॥
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