Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जो कुजादि ग्रहों के पात दिन में एक विकला का आधा भी नहीं चलते हैं, उनसे फल क्या हो सकता है? क्योंकि जितनी ही गति अधिक होती उतनी ही फल में भी अधिकता होती है। अतः सबसे अधिक गति होने के कारण चन्द्रमा सबसे अधिक फलप्रद है। अर्थात् इसी कारण से चन्द्रपात (राहु) में ग्रहत्व सिद्ध है ॥ ११ ॥
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