Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
यदि उदय और अस्त के नवांशाधिपों में मैत्री होना ही कारण हो तो — वह मैत्री यवनशाखा में ही प्रसिद्ध है। सत्याचार्य के मत से धनु मिथुन के स्वामियों में मैत्री नहीं है। और कुम्भ सिंह के स्वामियों में शत्रुता तो दोनों ही (यवन और सत्याचार्य) के शास्त्र में प्रसिद्ध है। इसलिये यवनमत से भी कुम्भ सिंह त्याज्य है, अतः यवन का ही मत श्रेष्ठ है।
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