Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
ध्रुव योग के तृतीयांश अवशेष रहने पर और ऐन्द्रयोग के तृतीयांश बीतने पर क्रान्तिसाम्य का सम्भव होता है। अर्थात् वहाँ क्रान्ति बनाकर देखना — यदि रवि चन्द्रमा के विम्बयोगार्ध से क्रान्ति का अन्तर अधिक हो तो दोष नहीं होता है। अर्थात् विम्बयोगार्ध से अल्प अन्तर हो तो दोष समझना चाहिये।
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