Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जिस नक्षत्र में उत्पात हुआ हो उसको और पापग्रह से व्यक्त नक्षत्र को यदि चन्द्रमा दोबारा भोग करे तो वह नक्षत्र ६ मास के भीतर भी सब शुभकार्य में शुभ होता है। तथा सूर्य और चन्द्रमा की तुल्य क्रान्ति को भी सब कार्यों से त्याग करना चाहिये।
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