Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जिस का दाढ़ी मुछ से श्याम वर्ण और ऊँचा ओठ हो, बड़ा बड़ा हाथ पेर हो, छोटे छोटे और रूखे अग्रभाग वाले केश हो, जो शोचहीन हो, बहुत रोमयुक्त शरीरवाली हो, जिसकी छोटी छोटी, टेढ़ी, चञ्चल और कपट भरी आँख हो, वामावर्ते रोम हो, बड़ा विशाल और ऊँचा ललाट, विचित्र रूप से नाचती भ्रू हो, खड़े समय दोनों पेर की कनिष्ठा (कनगुड़या) अंगुली पृथ्वी को स्पर्श नहीं करती हो, जो अनियम रूप से बहुत खानेवाली हो इस प्रकार की पत्नी मानो साक्षात् शरीर धारण किया हुआ रोग ही है ॥ १६ ॥
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