Vivāha Vṛndāvana
Chapter 14 · Mishra Prakarana (Miscellaneous Chapter) · Verse 13
Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi

शरीर में सव्य आवर्त (दहिने तरफ से घुमा हुआ) रोमवाला, वृष के समान गम्भीर शब्दवाला, जिसके मूत्र त्याग करने से फेन उठता हो, जिसकी एड़ी अत्यल्प न हो, मन गम्भीर, जिसका संशय रहित और उच्च कार्यारम्भ में रुचि हो, संसार में सुयश हो, चिक्कन दृष्टि, त्वचा, नख, दाँत और केश हो, युवावस्था वाला, सुन्दर वस्त्र रखने वाला, जो संवृत चेष्टा वाला हो, जिसका स्त्री के सदृश मुँह न हो, अत्यन्त कान्तियुत शान्त मूर्ति हो, आँख की तारे (पुतली) अत्यन्त कृष्णवर्ण न हो, उचित आचरण करने वाला, पवित्र, दूसरे की चेष्टा को जानने वाला, जिसका हाथ, मुख, बाहु और वक्षःस्थल (हृदय) विशाल हो, इन लक्षणों से युक्त रहने पर भी कुलीन और रोगहीन हो तो इस प्रकार का वर कन्यादान करने के लिये योग्य है ॥ १३-१५ ॥

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