Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जिसके स्वप्न में शरीर से रोम, नह वा वामनेत्र गिर पड़े, वा मनुष्य से भिन्न (व्याघ्र आदि) जन्तुओं को देखे, वा नाक, नेत्र, कान ये शिथिल हो जाय, अथवा गदहे आदि सवारियों पर आरूढ होकर दक्षिण दिशा में प्रेरित होकर जाता हुआ जाग पड़े, इस प्रकार के समीप मृत्युवाले वर का आय पुरुष कन्यादान के लिये वरण न करे ॥ १०-११ ॥
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