Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
यदि राशियों के स्वामी में मैत्री हो, वा एक ही हो तो सब (द्वादश आदि) में भी मेल होता है। अब तारा विचार कहते हैं — कन्या के नक्षत्र से वर के नक्षत्र तक गिनकर ९ के भाग देने से — ७-५-३ तारा क्रम से शोक, शत्रुता और विपत्ति देने वाली होती है। अर्थात् शेष तारा शुभ है।
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