Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
स्त्रियों के पाणिग्रहण में मकरस्थित सूर्य में भी पौष मास नेष्ट है, अगर कोई प्रवीण उसे (मकरस्थ सूर्य में पौष को) स्वीकार करते हैं तो मेषस्थ सूर्य में चैत्र भी शुभ हो सकता है। और माण्डव्यादि आचार्यों से कथित शुभ फाल्गुन मास के योग से क्या मीन भी अविकृत फल (यथोक्त फलप्रद) नहीं हो सकता है ? अर्थात् अवश्य अपने अशुभ फल को ही दे सकता है ॥ २॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.