Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
चैत्रमास प्रतिपदा रविवार में सूर्यादि समस्त ग्रहों के मेषादि में स्थित होने पर भूलोक, भुवर्लोक, स्वलोक की प्रवृत्ति हुई । इस प्रकार पौष मास मकरादिस्थित सूर्य में उक्त लोकों की प्रवृत्ति नहीं हुई, अतः विवाह विषय में वह चन्द्रमास ही अत्यन्त श्रेष्ठ कहा गया है ॥ १ ॥
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