Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जन्मराशि से वा जन्मलग्न से अष्टमराशि विवाहलग्न में हो तो मरण, और द्वादशराशि लग्न में हो तो निर्धनता, एवं उन अष्टम-द्वादश के स्वामी, या उन्हीं अष्टम-द्वादश में स्थित ग्रह लग्न में पड़े तो भी क्रम से मरण और निधनता समझना। वा उन्हीं अष्टम-द्वादश के नवांश वा तत्रस्थित ग्रहों की राशि के नवांश लग्न में हों तो भी क्रम से मरण और निधनता समझना। सप्तमेश का जो शत्रु हो उसका नवांश लग्न में पड़े तो दुःख, नाडीवेध हो, या षट्काष्टक होने पर राश्यधिपों में शत्रुता हो, या नर और राक्षस गण हों, तथा रवि गुरु और चन्द्र की शुद्धि न हो तो प्राणभय होता है ॥ ७ ॥
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