Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
लग्न में नवांश मिथुन, कन्या, धनु और तुला प्रशस्त हैं। लग्न से वा नवांश से नवांशस्वामी १२, २, ३, ८ स्थानों में किसी में हो तो वह लग्न नहीं ग्रहण करना। सप्तम भाव के नवांशस्वामी लग्नसप्तम से वा नवांशसप्तम से १२, २, ३, ८ इनमें हो तो लग्न शुभ नहीं है। तथा गण्डान्त, मलमास, और संक्रान्ति काल से पूर्व तथा पश्चात् २ पहर, यामार्ध, व्यतिपात, भद्रा, कुलिक, क्षयमास, अधिमास, तिथिक्षय, तिथिवृद्धि इनमें भी लग्न अशुभ होता है ॥ ६ ॥
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