Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
इस गोधूलि लग्न में नवांश वा लग्न अपने अपने स्वामी से युक्त दृष्ट न हो। इसमें सूर्य, मंगल, शनि और राहु के योग से भी भंग नहीं होता है। फिर केवल एक चन्द्रचार का क्या भय हो सकता है? तथा इसमें (उपरोक्त अष्टम षष्ठस्थित चन्द्र त्याग में) प्रमाण वचन भी हम लोगों ने कुछ नहीं सुना है ॥ ४ ॥
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