Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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शनिवार में सूर्य सहित, और गुरुवार में सूर्य के अस्त होने पर गोधूलि लग्न ग्राह्य है। वह भी केवल कुलिक और यामदल के न मिलने पर। इसमें प्रायः हीनवर्णों के लिये अशुभ प्रसंग से युक्त क्रूर क्षणों में भी शुभकारक करपीडन होता है — जब पञ्चांग परिशुद्ध हो तो और भी कहना ही क्या है ॥ ५ ॥
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