Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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गोधूलिक लग्न में भी कितने आचार्य अष्टम षष्ठ चन्द्र को जो त्याज्य कहते हैं वह उनका अपनी रुचि का ही प्रपञ्च है। क्योंकि सर्वदा सप्तम स्थित सूर्य में ही गोधूलिक लग्न होता है, इसलिये इसमें विवाह-विहित नक्षत्र और पञ्चाङ्ग शुद्धि मात्र देखना चाहिये ॥ ३ ॥
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