The signs Vrishabha, Karkataka, Dhanus, Mesha and Makara rise with their back (Prishtodaya), Mithuna and Meena come under Ubhayodaya. The rest appear with their faces and are termed Sirshodaya signs. The Prishtodaya signs and Mithuna belong to the Moon and are termed nocturnal Rasis. The other six belong to the Sun and are termed diurnal signs. The four signs counted from the Rasi last passed (left) by the Sun are in their order termed (1) Urdhva or tending upwards (2) Adhah — beneath or under (3) Sama — even or level and (4) Vakra — bent or crooked. The same order holds good in the case of the other 8 signs.
अब कौन-सी राशि अपने आगे की ओर से उदय होती है, कौन-सी पीछे की ओर से और कौन-सी दोनों ओर से यह बताते हैं — मेष: पृष्ठोदय । वृष: पृष्ठोदय । मिथुन: उभयोदय (बृहज्जातक के मतानुसार शीर्षोदय) कर्क: पृष्ठोदय । सिंह: शीर्षोदय । कन्या: शीर्षोदय तुला: शीर्षोदय । वृश्चिक: शीर्षोदय । धनु: पृष्ठोदय मकर: पृष्ठोदय । कुम्भ: शीर्षोदय । मीन: उभयोदय शीर्षोदय — सिर या आगे की ओर से उदय होने वाली। पृष्ठोदय — पीछे की ओर से उदय होने वाली। उभयोदय — दोनों ओर से उदय होने वाली। बहुत से विचारों में शीर्षोदय राशियाँ उत्तम मानी गई हैं; पृष्ठोदय क्रूर। शीर्षोदय राशि में स्थित ग्रह प्रारम्भ में ही अपना फल दिखाता है। पृष्ठोदय में स्थित अन्त में। उभयोदय में स्थित मध्य में। अब राशियों को (१) दिन में बली तथा (२) रात्रि में बली इन भागों में बाँटते हैं — दिवा बली: ५, ६, ७, ८, ११, १२। रात्रि बली: १, २, ३, ४, ९, १०। दिवा बली राशियों पर सूर्य का विशेष अधिकार है। रात्रि बली राशियों पर चन्द्रमा का। सूर्य जिस राशि को पार कर चुका है उससे गिनना प्रारम्भ कीजिये — इनकी क्रमशः ऊर्ध्व, अधः, सम, वक्र, यह संज्ञा है। उदाहरण के लिये सूर्य कन्या को पारकर तुला में आया तो कन्या से सिंह तक क्रमशः गिनिये। ऊर्ध्व, अधः, सम, वक्र, ऊर्ध्व, अधः, सम, वक्र, ऊर्ध्व, अधः, सम, वक्र। यह भिन्न-भिन्न राशियों की क्रमशः संज्ञा हुई।
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