HomeLibraryPhaladeepikaCh.1Verse 9
Phaladeepika
Chapter 1 · rāśi bheda · राशि भेद · Verse 9
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
मेषादाह चरं स्थिराख्यमुभयं द्वारं बहिर्गर्भभं
धातुर्मूलमितीह जीव उदितं क्रूरं च सौम्यं विदुः ।
मेषाद्याः कथितास्त्रिकोणसहिताः प्रागादिनाथाः क्रमा\-
दोजर्क्षं समभं पुमांश्च युवतिर्वामाङ्गमस्तादिकम्
IAST Transliteration
meṣādāha caraṃ sthirākhyamubhayaṃ dvāraṃ bahirgarbhabhaṃ dhāturmūlamitīha jīva uditaṃ krūraṃ ca saumyaṃ viduḥ | meṣādyāḥ kathitāstrikoṇasahitāḥ prāgādināthāḥ kramā\- dojarkṣaṃ samabhaṃ pumāṃśca yuvatirvāmāṅgamastādikam
TranslationsTwo-source verified
English

The signs from Mesha taken in order are (1) Chara — moveable or cardinal, Sthira — fixed and Ubhaya — dual, mutable or common; (2) Dwara — entrance, Bahis — outside and Garbha — inside; (3) Dhatu or mineral, Mula or vegetable and Jeeva or animal; (4) Krura or fierce and Saumya or auspicious; (5) odd and even and (6) male and female. Mesha, Vrishabha, Mithuna and Karkataka with their Trikona or triangular signs represent the four quarters commencing from the East. The six houses from the 7th represent the left-side limbs of Kalapurusha, while the other six houses (i.e., reckoned from the Lagna) represent the right-side ones.

Hindi

अब राशियों के कुछ अन्य लक्षण बतलाते हैं — मेष: चर, द्वार, धातु, क्रूर, विषम, पूर्व वृष: स्थिर, बहिः, मूल, सौम्य, सम, दक्षिण मिथुन: उभय, गर्भ, जीव, क्रूर, विषम, पश्चिम कर्क: चर, द्वार, धातु, सौम्य, सम, उत्तर सिंह: स्थिर, बहिः, मूल, क्रूर, विषम, पूर्व कन्या: उभय, गर्भ, जीव, सौम्य, सम, दक्षिण तुला: चर, द्वार, धातु, क्रूर, विषम, पश्चिम वृश्चिक: स्थिर, बहिः, मूल, सौम्य, सम, उत्तर धनु: उभय, गर्भ, जीव, क्रूर, विषम, पूर्व मकर: चर, द्वार, धातु, सौम्य, सम, दक्षिण कुम्भ: स्थिर, बहिः, मूल, क्रूर, विषम, पश्चिम मीन: उभय, गर्भ, जीव, सौम्य, सम, उत्तर चर का अर्थ है जिसमें कार्य जल्दी हो। यात्रा करे तो जल्दी वापिस आवे। स्थिर लग्न में कार्य करने से स्थायी होता है। स्थिर लग्न में मकान में प्रवेश करे तो बहुत वर्षों तक रहे। 'उभय' का पहिला आधा भाग स्थिर का प्रभाव दिखाता है; अन्तिम आधा भाग 'चर' का प्रभाव दिखाता है। मिला-जुला प्रभाव दिखाने के कारण इसे उभय (दोनों) कहते हैं। द्वार का अर्थ है दरवाजे पर। बहिः का अर्थ है बाहर। गर्भ का अर्थ है अन्दर। धातु का अर्थ है सोना, चाँदी, लोहा आदि। मूल का वृक्ष, फल, अन्न, खेती आदि। जीव का अर्थ है प्राणी — पुत्र, पौत्र आदि। मान लीजिये ग्रह के लक्षण से प्रतीत होता है कि लाभ होगा? किसका लाभ? जिस राशि में ग्रह है उसके लक्षण से बतलाइये कि किस प्रकार के लाभ या हानि की सम्भावना है। धातु की, या मूल की या मनुष्य की। क्रूर राशि में क्रूर ग्रह और भी क्रूर हो जाता है। सौम्य राशि में क्रूर ग्रह कम क्रूरता दिखाता है। इस प्रकार ग्रह की तथा राशि की क्रूरता तथा सौम्यता निश्चय कर परिणामतः कितनी क्रूरता या सौम्यता होगी यह निश्चय करना चाहिये। विषम का अर्थ है 'ऊना'। सम का अर्थ है 'पूरा'। ओज राशियों में अधिक ग्रह होने से मनुष्य में पुरुषार्थ, सत्त्व (ताकत, हिम्मत) आदि विशेष मात्रा में होते हैं। सम राशि में अधिक ग्रह होने से सुन्दरता, सुशीलता आदि अधिक होती है। ओज से तो १, ३, ५, ७, ९, ११ यह सभी राशियाँ क्रूर हैं, किन्तु इनमें भी ३, ७, ९ यह अपेक्षाकृत सौम्य हैं। क्योंकि इनके स्वामी शुभ ग्रह हैं। उसी प्रकार २, ४, ६, ८, १०, १२ यह सभी सौम्य राशियाँ हैं किन्तु इनमें भी अपेक्षाकृत २, ४, ६, १२ विशेष सौम्य हैं। क्योंकि इनके स्वामी शुभ ग्रह हैं। राशियों की दिशा बताने का प्रयोजन यह है कि जिस राशि में कारक ग्रह बैठे हों उस राशि की दिशा में भाग्योदय होता है। उदाहरण के लिये किसी की जन्मकुंडली में लग्नेश, नवमेश, दशमेश वृश्चिक राशि में हों तो उत्तर दिशा में भाग्योदय होगा यह कहिये।

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