If at a birth Jupiter, Mercury, Venus or the Moon occupy the 9th with bright rays, uneclipsed and also be aspected by, or associated with, friendly planets, the native concerned will become a great King worshipped by his subjects like a deity.
बृहस्पति, बुध, शुक्र या चन्द्रमा — अस्त न हों और विशुद्ध शरीर वाले होकर नवम भाव में बैठे हों (मूल श्लोक में 'धर्मे' शब्द आया है; नवम भाव से धर्म का विचार किया जाता है इसलिये धर्म स्थान का अर्थ हुआ लग्न से नवम स्थान) और मित्र ग्रहों से युत या वीक्षित हों तो जातक महान् राजा होता है और उसकी प्रजा उसे देवता के सदृश मानती है। मूल श्लोक में 'विशुद्धतनु' शब्द आया है इसका शब्दार्थ हुआ विशुद्ध शरीर वाला। ग्रह को विशुद्ध शरीर वाला कब और कैसे समझा जाय? जब वह पाप ग्रह या शत्रु की राशि या नवांश में न हो और पाप ग्रहों से युत या वीक्षित न हो, उच्च राशि-नवांश आदि में स्थित ग्रह — उस पर शुभ दृष्टि होने से विशुद्धतनु कहेंगे। जिस ग्रह-पिंड में दोष न हो वह विशुद्ध हुआ। जिन कारणों से ग्रह निकृष्ट समझा जाय, वे उसके दोष समझे जाते हैं।
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