I shall now clearly explain how to apportion the Bhukti periods in a Dasa and their further sub-divisions as also their effects in their order. Whatever has been here described as effect in the case of any planet, all that should be stated to occur in the planet's Dasa, in his Bhukti and in his Antara.
अब इस अध्याय में अन्तर्दशा और प्रत्यन्तर्दशा लगाना बताते हैं। एक महादशा में नवों ग्रहों की अन्तर्दशा होती है। जैसे सूर्य की महादशा छः वर्ष की है तो इस छः वर्ष में सूर्यादि नौ ग्रहों की अन्तर्दशा आवेंगी। जिस ग्रह की महादशा होती है सबसे पहले उसी की अन्तर्दशा भी होती है। उदाहरण के लिये बृहस्पति की महादशा में अन्तर्दशा का क्रम निम्नलिखित होगा : बृ०, श०, बु०, के०, शु०, आ०, चं०, भौ०, रा०। शुक्र की महादशा में अन्तर्दशा का क्रम होगा — शु०, आ०, चं०, भौ०, रा०, बृ०, श०, बु०, के०। जिस प्रकार एक महादशा में नौ अन्तर्दशा होती हैं उसी प्रकार किसी एक अन्तर्दशा में नौ प्रत्यन्तर्दशा होती हैं। जिस ग्रह की अन्तर्दशा होती है उसी की प्रत्यन्तर्दशा सबसे पहले आती है। ग्रहों का जो फल पिछले अध्यायों में बता चुके हैं वह उनकी महादशा, उनकी अन्तर्दशा और उनकी प्रत्यन्तर्दशा में लागू करने चाहिये।
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