In the Sarvashtakavarga the figures indicating the number of benefic dots in the 12 houses reckoned from (1) the Sun are 3, 3, 3, 3, 2, 3, 4, 5, 3, 5, 7, 2 = 43; (2) the Moon — 2, 3, 5, 2, 2, 5, 2, 2, 2, 3, 7, 1 = 36; (3) Mars — 4, 5, 3, 5, 2, 3, 4, 4, 4, 6, 7, 2 = 49; (4) Mercury — 3, 1, 5, 2, 6, 6, 1, 2, 5, 5, 7, 3 = 46; (5) Jupiter — 2, 2, 1, 2, 3, 4, 2, 4, 2, 4, 7, 3 = 36; (6) Venus — 2, 3, 3, 3, 4, 4, 2, 3, 4, 3, 6, 3 = 40; (7) Saturn — 3, 2, 4, 4, 4, 3, 3, 4, 4, 4, 6, 1 = 42; (8) Lagna — 5, 3, 3, 5, 2, 6, 1, 2, 2, 6, 7, 1 = 45. Total Sarvashtakavarga figure ... 337.
सर्वाष्टकवर्ग — प्रत्येक ग्रह अपने स्थान से किस राशि में कितने शुभ बिन्दु प्रदान करता है, यह अध्याय २३ में बताया गया है (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि — सात ग्रहों एवं लग्न से)। उदाहरण-कुण्डली के १२ भावों में सर्वाष्टकवर्ग बिन्दु — सूर्य ४३, चन्द्र ३६, मंगल ४९, बुध ४६, बृहस्पति ३६, शुक्र ४०, शनि ४२, लग्न ४५; कुल सर्वाष्टकवर्ग योग = ३३७। (वराहमिहिर एवं मन्त्रेश्वर के बीच कुछ शुभ-स्थानों में मतभेद है।)
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