The Ashtakavarga figures are to be computed as per rules stated (in this chapter) with respect to the positions of the planets (existing) at the birth-time of any person. In that particular Rasi, month, Bhava, etc., signified by the sign containing the greatest number of benefic dots, one ought to get done anything auspicious when the planets concerned transit those houses.
ऊपर जो सर्वाष्टकवर्ग बनाना बताया गया है, उसका एक अन्य उपयोग — अपने जन्म के समय जो ग्रह जिस राशि में थे, उन आठ आधारों पर तैयार किये गये सर्वाष्टकवर्ग में जिस-जिस राशि में अधिक बिन्दु हों, उन में शुभ कार्य करने चाहिये — ऐसा करने से विशेष सफलता प्राप्त होगी। उदाहरण के लिये जन्म-लग्न सिंह है और सिंह राशि में सर्वाष्टकवर्ग में ४० बिन्दु पड़े हैं — तो जब सिंह में सूर्य हो, या सिंह में चन्द्रमा हो, या सिंह में बृहस्पति हो, या जब पूर्वीय क्षितिज पर सिंह-लग्न उदित हो — तब इस कुण्डली वाला जातक जो कार्य करेगा उसमें विशेष सफलता होगी। प्रत्येक मनुष्य को कौन-सा वर्ष, मास या दिन अधिक अनुकूल या सफलता-देने वाला होगा यह देखने के लिये सर्वाष्टकवर्ग एक साधन है।
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