Find the number of benefic dots contained in the several auspicious houses reckoned from the Moon. Note also what planets occupy benefic houses counted from the Moon in the horoscope of the native and find the number of benefic dots in each of these houses. If the sum-total in either of these above two cases exceed 28, the effect must be pronounced as good; if below that figure, it will be bad.
टिप्पणी: बहुत-से लोग लग्न से इस प्रकार विचार करते हैं — मान लीजिये प्रथम भाव में ४० शुभ बिन्दु पड़े तो प्रथम, १३वें, २५वें, ३७वें, ४९वें, ६१वें, ७३वें वर्ष में अभ्युदय। यदि अष्टम भाव में कुल १९ बिन्दु पड़े हों तो ८वें, २०वें, ३२वें, ४४वें, ५६वें, ६८वें वर्ष में शरीर-कष्ट आदि। जिस भाव में अधिक बिन्दु पड़े हों उस-उस वर्ष में और उससे प्रत्येक १२वें वर्ष में शुभ; जिस भाव में थोड़े बिन्दु हों उस वर्ष में और उससे प्रत्येक १२वें वर्ष में कष्ट। (विशेष विवरण के लिये देखिये श्री जीवनाथ शर्मा विरचित 'जन्म-पत्रिका विधानम्' पृ. ३६–४१।) प्रायः षष्ठ-अष्टम-द्वादश — ये तीन अशुभ भवन माने जाते हैं; बाकी शुभ भवन। शुभ भवनों में अधिक बिन्दु होना शुभ है। इसी प्रकार चन्द्र-लग्न से विचार कीजिये — (क) चन्द्र-लग्न से शुभ भवनों में २८ से अधिक संख्या हो तो उन भावों की समृद्धि; २८ से कम हो तो उनकी हानि। (ख) चन्द्रमा से किन भावों में शुभ ग्रह पड़े हैं — यदि इन शुभ-ग्रहाधिष्ठित राशियों में २८ से अधिक बिन्दु हैं तो उन भावों की समृद्धि; २८ से कम हों तो विपत्ति।
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