When the Sarvashtakavarga containing the results of the Ashtakavargas of all the planets is computed by setting forth in each Rasi the sum-total of all the figures for that Rasi in the seven Ashtakavargas, if it be found that any Rasi contains figures exceeding 28, it must be understood that planets in their transit over that Rasi produce good or auspicious effects. Any number falling short of that particular figure produces danger, or sorrow proportionately varying in intensity.
अब सर्वाष्टकवर्ग बनाना बताते हैं। प्रत्येक अष्टकवर्ग में किस राशि में कितने शुभ बिन्दु हैं — यह लिख लीजिये; फिर एक नया अष्टकवर्ग-चक्र बनाकर भिन्न-भिन्न अष्टकवर्गों में जितने शुभ बिन्दु हैं उनको प्रत्येक राशि के विचार से जोड़ लीजिये। उदाहरण के लिये सिंह राशि में सातों अष्टकवर्ग में क्रमशः ५, ६, ५, ५, ७, ५, ७ शुभ बिन्दु पड़े हैं — इनका योग ४० होगा; सर्वाष्टकवर्ग में सिंह राशि में '४०' लिखेंगे। इसी प्रकार प्रत्येक राशि का योग सर्वाष्टकवर्ग में लिखा जाता है। जिस राशि में २८ से अधिक शुभ बिन्दु पड़ें — उसमें जब गोचरवश कोई ग्रह जाता है तो अच्छा फल; २८ से कम संख्या में अशुभ फल। २८ से जितनी कम संख्या होगी उतना अशुभ अधिक होगा। शंका: मान लीजिये सर्वाष्टकवर्ग में किसी राशि में ३० बिन्दु आये किन्तु शनि के स्वयं के अष्टकवर्ग में उसी राशि में दो ही बिन्दु हैं, तो शनि का गोचर शुभ जायेगा? उत्तर — प्रत्येक ग्रह के स्व-अष्टकवर्ग एवं सर्वाष्टकवर्ग — दोनों में बिन्दु-संख्या का तारतम्य करना चाहिये। दोनों में शुभ = पूर्ण शुभ; दोनों में अशुभ = पूर्ण अशुभ; एक में शुभ-एक में अशुभ = मध्यम फल।
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