HomeLibraryPhaladeepikaCh.23Verse 13
Phaladeepika
Chapter 23 · praṣṭakavarga · प्रष्टकवर्ग · Verse 13
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
तत्तद्ग्रहर्क्षाशकतुल्यभांश
स्थिता ग्रहाश्चारवशादिदानीम् ।
तथैव तद्भावसमुत्थितानि
फलानि कुर्वन्ति शुभाशुभानि
IAST Transliteration
tattadgraharkṣāśakatulyabhāṃśa sthitā grahāścāravaśādidānīm | tathaiva tadbhāvasamutthitāni phalāni kurvanti śubhāśubhāni
TranslationsTwo-source verified
English

Note the Rasi and Navamsa occupied by a planet at birth. When the planet in its course traverses through so much of the distance in that house, it produces the effects due to that Bhava — good or bad as the case may be.

Hindi

अब यह बताते हैं कि गोचरवश शुभाशुभ फल कब होगा। बृहस्पति एक राशि में साल भर रहता है और शनि २½ वर्ष — तब यह कैसे निश्चय किया जाय कि इस लम्बे असे में गोचरवश ग्रह अपना इष्ट या अनिष्ट प्रभाव कब दिखाएगा? मान लीजिये उदाहरण-कुण्डली में बृहस्पति के १४ अंश हैं और कन्या राशि में (लग्न से दूसरे) बृहस्पति के ७ शुभ बिन्दु हैं — तो जब कन्या राशि में बृहस्पति के गोचरवश करीब १४ अंश होंगे तब वह अपना फल दिखावेगा। प्रत्येक जन्म-कुण्डली में ग्रहों के अंश भिन्न-भिन्न होते हैं, इसी से कोई ग्रह गोचरवश शुभ या अशुभ होने पर भी भिन्न-भिन्न अंश प्राप्त होने पर भिन्न-भिन्न लोगों को अलग-अलग समय पर फल दिखाता है। यज्ञदत्त, देवदत्त, भवदत्त — तीनों को धनु का बृहस्पति गोचरवश अनुकूल है, किन्तु इनकी कुण्डलियों में बृहस्पति के क्रमशः ७, १४, २१ अंश हैं — तो धनु राशि में जब बृहस्पति के क्रमश: ७, १४, २१ अंश होंगे तब इन तीनों को बारी-बारी शुभ फल प्राप्त होगा।

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