When the length of day is 30 Ghatikas, the position of Mandi on the week days counting from Sunday onwards is at the end of 26, 22, 18, 14, 10, 6 and 2 Ghatikas during day time. These figures have to be proportionately increased or diminished according as the length of day chosen is greater or less than 30 ghatikas. In the night time, the lords of the first seven Muhurtas are counted, not from the lord of the week day chosen, but from that of the 5th; the position of Mandi at night time will be different on the week days, viz., at the end of Ghatikas 10, 6, 2, 26, 22, 18 and 14 respectively.
यदि दिनमान ३० घड़ी हो तो — रविवार को सूर्योदय के २६ घड़ी बाद मान्दि होगा; सोमवार को २२ घड़ी बाद; मंगलवार को १८ घड़ी बाद; बुध को १४ घड़ी बाद; बृहस्पतिवार को १० घड़ी बाद; शुक्रवार को ६ घड़ी बाद; और शनिवार को सूर्योदय के २ घड़ी बाद मान्दि होता है। यदि दिनमान पूरा तीस घड़ी न हो — कुछ कम या अधिक हो — तो उसी अनुपात से इन घड़ियों में अन्तर कर देना चाहिये। रात्रि के समय मान्दि की स्थिति: रविवार को सूर्यास्त के १० घड़ी बाद; सोमवार को ६ घड़ी बाद; मंगलवार को २ घड़ी बाद; बुध को २६ घड़ी बाद; बृहस्पतिवार को २२ घड़ी बाद; शुक्रवार को १८ घड़ी बाद; शनिवार को सूर्यास्त के १४ घड़ी बाद। रात्रिमान यदि पूरा तीस घड़ी न हो तो अनुपात से अन्तर करना चाहिये। एक अन्य पद्धति — मान्दि और गुलिक एक ही बात है। दिनमान के आठ भाग कीजिये। सात भागों के स्वामी सातों वारों के स्वामी होते हैं; आठवें भाग का स्वामी कोई नहीं होता। शनि के भाग का जो काल है उसे मान्दि या गुलिक कहते हैं। 'मन्द' शनि का नाम है — मन्द कहते हैं धीरे को; शनैश्चर का अर्थ भी है धीरे चलने वाला। दिन के समय जो वार होता है उसी से गणना प्रारम्भ करते हैं; किन्तु रात्रि के समय वारेश से पाँचवें वार से गणना प्रारम्भ करते हैं।
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